ज़द्दोजहद

वही करो जो करना चाहते हो वरना तुम्हारी ज़िन्दगी बस उन्हीं चीजों से जूझने में बीत जाएगी जिन्हें तुम नहीं नहीं करना चाहते। जो भी कह लो, एक बात तो तय है की तुम्हे लड़ना पड़ेगा अब चाहे उस चीज के लिए लड़ो जो तुम चाहते हो या अपने आप से लड़ो उस चीज को करने के लिए जो तुम नहीं चाहते हो…


… ऐसा शायद ही कोई दिन होगा जब ये ख़याल मेरे मन में मन में न आएं हों | मेरी उमर के लोगों की अपनी समस्यांए हैं और मेरी बस इतनी की - इस जीवन का अर्थ क्या हैं?



क्या कोई मुझे इस सवाल का जवाब दे सकता है? 


बाकी सब तो ठीक था पर ज़िन्दगी ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी मुझे एक मेट्रो सिटी में भेजकर। पहले जिन सवालों का जवाब ढूढ़ना मुश्किल था, अब  उन्हें और ज़्यादा उलझा कर रख दिया


अब हर रोज की बस यही ज़द्दोजहद है कि, कैसे इस चक्रव्यूह से बाहर निकलें… जरा सोचो तो रूककर - बचपन से वह तो करते आ रहे हैं - वही सुबह का अलार्म - वही दोपहर का टिफ़िन - और वही छुट्टी होने का इंतजार।  


चाहे स्कूल हो, चाहे कॉलेज और अब ऑफिस; फर्क बस इतना पड़ा है कि जो दिन पहले नौ से पांच तक खत्म हो ही जाता था, आज नौ से नौ बजे तक भी ख़त्म नहीं होता।


हाँ ! यही जद्दोज़हद है, यही लाइफ है। क्योंकि हम आम आदमी हैं, न तो घर में बैठ सकते हैं आराम से - न ही निकम्मे घूम सकते हैं यूँ ही।


पर फिर क्या होगा ? क्या ऐसे ही मर जायेंगे ? कई बार मैं खुद से पूछती हूँ - कितने में बेचीं अपनी आजादी? गलत मत समझिये - Time Freedom की बात कर रही हूँ।  यही तो वो चीज है जिसे हम केवल Financial Freedom पाने की चाह में भूल जाते हैं।  


और अपनी लाइफ को जीना भूल जाते है, वो करना भूल जाते हैं जो हम हमेशा से चाहते थे। अब भूल क्या जाते हैं बस कुछ नहीं कर सकते। इस भाग-दौड़ वाली लाइफ में यदि हम अपने लिए ही टाइम निकल लें तो बड़ी बात है और परिवार, खास कर जो अपने परिवार से बहुत दूर रहते हैं - उनका तो पूछो ही मत !लेकिन, अफ़सोस मेरे पास भी इस चक्रव्यूह से निकलने का कोई रास्ता नहीं है। बस इतना पता है कि, जो भी करना है खुद करना है और जल्दी करना है। इस लाइफ के कुछ पल अपनी शर्तों में जीना है।


 यही जद्दोज़हद है… यही जीवन है… हारो या जीतो बस चलते रहो। 


-रितिका  


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