सड़क और सिद्धांत/हिंदी कहानी

सड़क और सिद्धांत/हिंदी कहानी

भर्र-भर्र करती हुई एक जीप दुकान के सामने रुकी ।  ' ओ चायवाले , चार कप चाय बनाना ,' - कह कर एक आदमी तीन आदमियों के साथ दुकान के...
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फूल और काँटा/हिंदी कविता

फूल और काँटा/हिंदी कविता

फूल और काँटा / अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ - एक दुसरे का हिस्सा होते हुए फूल और कांटे, एक दूसरे से कितने अलग होते हैं , पढ़िए ये beautif...
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पक्षी और बादल - कविता/दिनकर

पक्षी और बादल - कविता/दिनकर

पक्षी और बादल, ये भगवान के डाकिए हैं जो एक महादेश से दूसरें महादेश को जाते हैं। हम तो समझ नहीं पाते हैं मगर उनकी लाई चिट्ठियाँ पेड़,...
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हमें नहीं चाहिए

हमें नहीं चाहिए

हमें नहीं चाहिए / अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’- Friends ! हमें अपने लिए कैसा गुरु, साधू, पंडित या उपदेशक चाहिए , हो सकता है इसकी परिभाषा ...
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हो गई है पीर पर्वत-सी

हो गई है पीर पर्वत-सी

हो गई है पीर पर्वत-सी / दुष्यंत कुमार - दुखों और पीड़ाओं से जब हमारा मन भर जाता है और सहनशक्ति की हद हो जाती है तब आखिरकार वह पुका...
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